Thursday, January 5, 2012

आज शके १९३३ शुक्ल पक्ष द्वादशी

आज शके १९३३ शुक्ल पक्ष द्वादशी, दि. ०६ जाने २०१२, सूर्योदय ६.२२, सूर्यास्त ०६.४१

यदा यदा हि धर्मस्य ...ग्लानिर्भवति भारत... अभ्युत्थानमधर्मस्य.. तदात्मान.म सृजाम्यहम...
परित्राणाय साधुनाम... विनाषाय च दुष्कृताम... धर्म संस्थापनार्थाय स.म्भवामि युगे युगे ||

‘यदा-यदा हि धर्मस्य….धरा पर जब-जब दुर्जन, दुराचारी बढ़ेंगे, भले लोग छले जाएंगे…मैं अवतार लेकर सज्जनों का उद्धार करने आऊंगा…’ ईश्वर ने गीता में कहा था, लिखा नहीं था. जिसने लिखा, उसने लिखने के बाद कभी उससे जिक्र तक नहीं किया. आरती, प्रसाद, भोग, घंटा-ध्वनि, पूजा-अर्चना, नाम-जप, जय-जयकार और अमरलोक-सुंदरी लक्ष्मी के संगवास में ईश्वर के दिन पलक झपकते हवा हो जाते.

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